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विविधता की परिभाषा और आवश्यकता | Definition and Need of Diversity

  विविधता की परिभाषा और आवश्यकता | Definition and Need of Diversity विश्व एक रंगबिरंगी और सुंदर संसार है जिसमें हर वस्तु एवं व्यक्ति अद्वितीय होता है। इस संसार में विविधता का महत्व अविच्छिन्न है। विविधता से अभिप्रेत चीजों को मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला है। विविधता के प्रतीक रंग , भाषा , जाति , धर्म , संस्कृति , रीति-रिवाज और सोच हैं , जो हमें एक दूसरे से अलग और समृद्ध बनाता हैं। विविधता का महत्व - समृद्ध समाज के निर्माण में अद्वितीय योगदान (Importance of Diversity - Unique Contribution in Building a Prosperous Society) विविधता एक ऐसा महत्वपूर्ण तत्व है जो हमारे समाज और समृद्ध समाज के निर्माण में अद्वितीय योगदान प्रदान करता है। विविधता में जीने का अर्थ होता है एक-दूसरे को सम्मान देना , स्वीकार करना और संगठित तरीके से अभिव्यक्ति करना। इससे हमारे समाज में अन्याय , असमानता और समानता के लिए जागरूकता पैदा होती है। यह हमें विचारशीलता , समानता और सहयोग की महत्वपूर्णता को समझने में मदद करता है। विविधता का अनुभव हमें विभिन्न सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आध...

Study Material NCERT Social and Political Life : Political Science Class - 6: Understanding Diversity

  Definition of Diversity - Understanding the Essence of Variance  Introduction  Diversity, in its true essence, is a remarkable attribute that permeates our society. It encompasses an extensive range of characteristics, perspectives, and experiences that make each individual unique. The concept of diversity is not limited to physical attributes alone; it encompasses variations in culture, religion, ethnicity, gender, sexual orientation, age, socioeconomic status, and more. In this article, we embark on a journey to explore the definition of diversity and its profound impact on our lives. Political Science Class - 6: Understanding Diversity    The Definition of Diversity Embracing Variance  Definition of Diversity A Multifaceted Approach - Diversity refers to the recognition and appreciation of the uniqueness that exists among individuals. It is the celebration of differences and the understanding that each person brings a distinct set of qualiti...

कोको द्वीप भारत के पास क्यों नहीं है? | Why Doesn't India Have the Cocoa Islands?

  कोको द्वीप का परिचय  (Introduction to Cocoa Island) अंडमान निकोबार के लगभग 5000 द्वीपों में से एक है कोको द्वीप। लेकिन कब्जा बर्मा का है। 19 वीं सदी में अंग्रेजों ने अंडमान में कलोनी बसाई जहां सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाता था। इनके लिए खाने पीने का सामान कोको से आता था , अर्थात इनके खाने-पीने समान की व्यवस्था कोको द्वीप से की जाती थी। जमींदारी सिस्टम की तरह अंग्रेजों ने बर्मा के जायवेट परिवार को कोको आइलैंड लीज पर दे दिया था। 1882 में ये ब्रिटिश बर्मा का हिस्सा बन गया। 1937 में बर्मा अंग्रेजों से मुक्त हो गया। कोको स्वशासित द्वीप की तरह कुछ समय रहा। कोको द्वीप भारत को क्यों नहीं मिला ? (Why Didn't India Get Cocoa Island? जब भारत 1947 में आजाद हुआ तो लक्षद्वीप , अंडमान और निकोबार की तरह कोको आइलैंड की स्थिति भी स्पष्ट नहीं थी। अंग्रेज एक मजबूत स्वतंत्र भारत नहीं चाहते थे इसलिए इन द्वीपों को देने के पक्ष में नहीं थे। इनका सामरिक महत्व था। इंडिया इंडिपेंडेंस बिल में अंडमान निकोबार द्वीप समूहों को भारत में रखा गया। इस हिसाब से कोको द्वीप को भी भारत का हिस्सा होना चाहि...

क्या लाल सागर में 47 साल पुराना टैंकर फटने वाला है | 47 Year Old Tanker About to Explode in the Red Sea?

47 साल पुराना टैंक का परिचय | Introduction to 47 Year Old Tanks 2015 में यमन ने एक मिलियन बैरल तेल से भरे एक सुपर टैंकर वेसल को रेड सी यानी लाल सागर में छोड़ दिया था। अब 8 साल बाद संयुक्त राष्ट्र संघ यानी UN ने कहा है कि ये वेसल किसी भी समय या फट जाएगा या डूब जाएगा। टैंक फटने पर क्या नुकसान होगा? (What Will Happen if the Tank Explodes?) तेल समुद्र में फैला तो प्रदूषण 30 साल तक रहेगा। इससे यमन समेत 4 देशों को काफी नुकसान होने की आशंका है। UN ने अब आखिरी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तुरंत कोई एक्शन नहीं लिया गया तो इससे हुए नुकसान की भरपाई नामुमकिन होगी। तेल लीक होने के 2 हफ्तों बाद सऊदी, जिबूती और इरिट्रिया तक भी पहुंच जाएगा। समुद्र में फैले तेल की वजह से मछलियों की 1000 दुर्लभ प्रजातियां और 365 तरह के कोरल रीफ खत्म हो जाएंगे। समुद्र के रास्ते जंग से प्रभावित यमन के इलाकों में UN जो मदद भेज रहा है, वो भी रुक जाएगी, जिससे 60 लाख लोगों की जिंदगी पर असर पड़ेगा। स्टोरेज वेसल साफेर के विषय में जानकारी (About Storage Vessel Safer) साफेर को 1976 में एक जापानी कंपनी हिटाची जेसोन ने बनाया ...

अंजी ब्रिज केबल आधारित पुल | Anji Bridge Cable Stayed Bridge

  भारत का पहला केबल आधारित पुल  (India's first cable-stayed bridge) अंजी ब्रिज , देश का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक ( USBRL) परियोजना का हिस्सा है। अंजी नदी जम्मू के कटरा और रियासी जिले के बीच चिनाब नदी की एक सहायक नदी है। जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से बारहमासी रेल कनेक्टिविटी के साथ जोड़ने के भारतीय रेलवे के लक्ष्य में अंजी पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी है।   अंजी पुल पर बड़ी संख्या में सेंसर लगाए गए हैं ताकि संरचनात्मक स्वास्थ्य की नियमित रूप से निगरानी की जा सके। इसे भारी तूफान और 213 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा की गति को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।   परियोजना का महत्व  (Importance of the project) इस परियोजना से क्षेत्र के भीतर और देश के बाकी हिस्सों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से जम्मू और कश्मीर राज्य का सामाजिक-आर्थिक विकास होने की उम्मीद है। इस परियोजना की परिकल्पना एक कुशल सभी मौसम परिवहन चैनल प्रदान करने के लिए की गई थी जो प्रतिकूल मौसम की स्थिति में कार्य कर सके और घाटी के भीतर और बाहर विभिन्न...

डोकलाम विवाद का विश्लेषण | Analysis of Doklam Dispute

भारत और भूटान के मध्य सहयोग संधि (Cooperation Treaty Between India and Bhutan) भारत और चीन की ज़मीनी सरहदों में घिरे भूटान ने 1949 के मित्रता और सहयोग संधि के बाद से भारत के साथ विशेष संबंध क़ायम रखे हैं। उधर चीन के साथ भूटान ने बग़ैर किसी राजनयिक संपर्क के भी तटस्थ रिश्ता बनाए रखा है। चीन की ओर से भूटान के कई इलाक़ों पर दावे किए जाते हैं। इनमें उत्तर की पासामलुंग और जाकारलुंग घाटी शामिल हैं, जो भूटान के लिए बेहद अहम हैं। पश्चिम दिशा में डोकलाम, ड्रामना और शाखटोई, याक चु और चारिथांग चु, सिंचुलुंगपा और लांगमार्पो घाटियों पर भी चीन अपना दावा ठोकता रहा है। ये इलाक़े चाराग़ाह के लिहाज़ से समृद्ध होने के साथ-साथ सामरिक रूप से भूटान और भारत-चीन के त्रिकोण (trijunction) पर स्थित हैं। ये क्षेत्र भारत के सिलिगुड़ी गलियारे के बेहद नज़दीक है। डोकलाम विवाद 2017 (Doklam Standoff 2017) 2017 में भूटान ने डोकलाम में चीन की ओर से बनाई जा रही सड़क का विरोध किया था। इसके समर्थन में भारत भी सामने आ गया था। भूटान और चीन के बीच विवाद की वजह से भारत के साथ भी तनातनी की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। डोकलाम ट्राई जंक...

सीरिया और सऊदी अरब का रिश्ता व इतिहास | The Relationship and History of Syria and Saudi Arabia

परिचय (Introduction) मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल्द ही सऊदी और सीरिया के बीच भी कूटनीतिक संबंध बहाल हो सकते हैं। 11 साल पहले यह रिश्ते टूट गए थे। इससे जुड़ी एक और बड़ी खबर यह है कि अगर सीरिया और सऊदी के डिप्लोमैटिक रिलेशन री- इन्सटॉल हुए तो सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद और उनके मुल्क की 22 अरब देशों के ग्रुप यानी अरब लीग में वापसी भी सकती है। ईरान और सीरिया सऊदी अरब से रिश्ते (Iran and Syria Relations with Saudi Arabia) न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक - ईरान और सऊदी अरब के बीच रिश्ते सुधरने के बाद सीरिया ने भी ऐसा करने का फैसला किया है। ऐंबैसी अप्रैल में ईद के बाद खुल सकती हैं। गल्फ डिप्लोमैट ने बताया कि ये फैसला सऊदी अरब और एक सीरियन इंटेलिजेंस ऑफिसर के बीच कई दौर की बातचीत के बाद लिया गया।  इस मामले में खास बात यह है कि जब ईरान और सऊदी अरब के डिप्लोमैटिक रिलेशन बहाल हुए तो चीन ने इसमें अहम रोल प्ले किया था। अमेरिका को इस बातचीत की भनक तक नहीं लगी। अब अगर सीरिया और सऊदी के रिलेशन बहाल होते हैं, तो गल्फ में अमेरिकी दबदबे को ये एक और बड़ा झटका होगा। बशर अल असद ...