सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कोको द्वीप भारत के पास क्यों नहीं है? | Why Doesn't India Have the Cocoa Islands?

 

कोको द्वीप का परिचय (Introduction to Cocoa Island)

अंडमान निकोबार के लगभग 5000 द्वीपों में से एक है कोको द्वीप। लेकिन कब्जा बर्मा का है। 19 वीं सदी में अंग्रेजों ने अंडमान में कलोनी बसाई जहां सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाता था। इनके लिए खाने पीने का सामान कोको से आता था, अर्थात इनके खाने-पीने समान की व्यवस्था कोको द्वीप से की जाती थी। जमींदारी सिस्टम की तरह अंग्रेजों ने बर्मा के जायवेट परिवार को कोको आइलैंड लीज पर दे दिया था। 1882 में ये ब्रिटिश बर्मा का हिस्सा बन गया। 1937 में बर्मा अंग्रेजों से मुक्त हो गया। कोको स्वशासित द्वीप की तरह कुछ समय रहा।



कोको द्वीप भारत को क्यों नहीं मिला? (Why Didn't India Get Cocoa Island?

जब भारत 1947 में आजाद हुआ तो लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार की तरह कोको आइलैंड की स्थिति भी स्पष्ट नहीं थी। अंग्रेज एक मजबूत स्वतंत्र भारत नहीं चाहते थे इसलिए इन द्वीपों को देने के पक्ष में नहीं थे। इनका सामरिक महत्व था। इंडिया इंडिपेंडेंस बिल में अंडमान निकोबार द्वीप समूहों को भारत में रखा गया। इस हिसाब से कोको द्वीप को भी भारत का हिस्सा होना चाहिए। लेकिन अंग्रेजों ने अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए कोको पर नजरें गड़ा दीं। 

लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू जी से कहा कि वो इसे लीज पर ब्रिटेन को दे दें। 19 जुलाई 1947 को माउंटबेटन ने बताया कि भारत सरकार ने कोको आइलैंड पर उनकी राय मान ली है। जिसे नेहरू जी की ऐतिहासिक भूल माना जाता है। जहां सरदार पटेल ने लक्षद्वीप पर पाकिस्तानी नजर को कुंद कर दिया, वहीं नेहरू आसानी से मान गए। अंग्रेजों ने बाद में कोको आइलैंड बर्मा को दे दिया। बर्मा का वर्तमान में म्यांमार नाम है।

-------

By Sunaina


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या लाल सागर में 47 साल पुराना टैंकर फटने वाला है | 47 Year Old Tanker About to Explode in the Red Sea?

47 साल पुराना टैंक का परिचय | Introduction to 47 Year Old Tanks 2015 में यमन ने एक मिलियन बैरल तेल से भरे एक सुपर टैंकर वेसल को रेड सी यानी लाल सागर में छोड़ दिया था। अब 8 साल बाद संयुक्त राष्ट्र संघ यानी UN ने कहा है कि ये वेसल किसी भी समय या फट जाएगा या डूब जाएगा। टैंक फटने पर क्या नुकसान होगा? (What Will Happen if the Tank Explodes?) तेल समुद्र में फैला तो प्रदूषण 30 साल तक रहेगा। इससे यमन समेत 4 देशों को काफी नुकसान होने की आशंका है। UN ने अब आखिरी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तुरंत कोई एक्शन नहीं लिया गया तो इससे हुए नुकसान की भरपाई नामुमकिन होगी। तेल लीक होने के 2 हफ्तों बाद सऊदी, जिबूती और इरिट्रिया तक भी पहुंच जाएगा। समुद्र में फैले तेल की वजह से मछलियों की 1000 दुर्लभ प्रजातियां और 365 तरह के कोरल रीफ खत्म हो जाएंगे। समुद्र के रास्ते जंग से प्रभावित यमन के इलाकों में UN जो मदद भेज रहा है, वो भी रुक जाएगी, जिससे 60 लाख लोगों की जिंदगी पर असर पड़ेगा। स्टोरेज वेसल साफेर के विषय में जानकारी (About Storage Vessel Safer) साफेर को 1976 में एक जापानी कंपनी हिटाची जेसोन ने बनाया ...

Study Material NCERT Class – 6 : Chapter 7 City Administration

  What is City Administration   City administration refers to the system and processes through which a city or municipality is governed and managed. It encompasses various governmental functions and responsibilities carried out by the local authorities to ensure the smooth functioning and development of the city.  City administration typically includes the following elements-  Executive Branch - The executive branch consists of the mayor or city manager and their administrative staff. They are responsible for implementing and enforcing policies, managing city departments, and overseeing the day-to-day operations of the city.  Legislative Branch -   The legislative branch comprises the city council or city commission. They are responsible for making and passing local laws, ordinances, and regulations that govern the city. The council members or commissioners are elected by the citizens to represent their interests.  Administrative Departm...

अंजी ब्रिज केबल आधारित पुल | Anji Bridge Cable Stayed Bridge

  भारत का पहला केबल आधारित पुल  (India's first cable-stayed bridge) अंजी ब्रिज , देश का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक ( USBRL) परियोजना का हिस्सा है। अंजी नदी जम्मू के कटरा और रियासी जिले के बीच चिनाब नदी की एक सहायक नदी है। जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से बारहमासी रेल कनेक्टिविटी के साथ जोड़ने के भारतीय रेलवे के लक्ष्य में अंजी पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी है।   अंजी पुल पर बड़ी संख्या में सेंसर लगाए गए हैं ताकि संरचनात्मक स्वास्थ्य की नियमित रूप से निगरानी की जा सके। इसे भारी तूफान और 213 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा की गति को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।   परियोजना का महत्व  (Importance of the project) इस परियोजना से क्षेत्र के भीतर और देश के बाकी हिस्सों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से जम्मू और कश्मीर राज्य का सामाजिक-आर्थिक विकास होने की उम्मीद है। इस परियोजना की परिकल्पना एक कुशल सभी मौसम परिवहन चैनल प्रदान करने के लिए की गई थी जो प्रतिकूल मौसम की स्थिति में कार्य कर सके और घाटी के भीतर और बाहर विभिन्न...